फरीदाबाद। हाल ही में चिकित्सा जगत के सर्वोच्च पुरस्कार डॉ.बी.सी.रॉय अवॉर्ड से नवाजे गए डॉ.एस.एन. मिश्रा और डॉ. एन.के.पाण्डेय को आईएमए ए.एम.एस हरियाणा और आईएमए फरीदाबाद ने मिलकर सम्मानित किया। सम्मान समारोह का आयोजन रविवार देर शाम होटल मिलेनियम में किया गया। इस अवसर डॉक्टर मिश्रा और डॉ पाण्डेय को शाल और स्मृति चिह्न भेंट किए गए । डॉ.पाण्डेय ने अपने इस पुरस्कार का श्रेय शहर के सभी डॉक्टरों को दिया। इस मौके पर डॉ. आरसीअरोड़ा, डॉ. आर.एन.रस्तोगी, डॉ.अनिल गोयल, डॉ.अश्विनी बख्शी, डॉ.एस.डी.पाराशर, डॉ.सुरेंद्र दत्ता, डॉ.नरेंद्र अग्रवाल, डॉ.सतीश गुप्ता, डॉ.नरेश सूरी, डॉ. प्रकाश रस्तोगी, डॉ. दिनेश गुप्ता, डॉ. सुरेश अरोड़ा, डॉ.एस.पी.एस.भाटिया, डॉ. ओ.पी.राकेश, डॉ.पंकज भाटिया आदि सहित लगभग 250 डॉक्टर मौजूद थे। आईएमए हरियाणा के प्रधान डॉ.विनोद तायल, प्रदेश सचिव डॉ.वी.एन.सूद, डॉ.सतीश चुघ, डॉ.जसपाल, गुडग़ांव आईएमए की प्रेजिडेंट डॉ.पुष्पा सेठी एवं पूर्व प्रधान डॉ.सुरेश वशिष्ठ ने भी समारोह में शिरकत की।
Monday, July 28, 2008
धीरज खोते मरीजों पर डॉक्टरों ने जताई चिंता
फरीदाबाद। किसी भी मरीज या उसके परिजनों को कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है। वे न तो डॉक्टरों के साथ मारपीट कर सकते हैं और न ही अस्पतालों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। अगर वे ऐसा करते हैं तो डॉक्टर उनके खिलाफ पुलिस में मामले दर्ज कराएं। यह कहना था आईएमए के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. एस.एन.मिश्रा का। डॉक्टर मिश्रा मिलेनियम होटल में आयोजित एक सेमिनार में बतौर मुख्यअतिथि बोल रहे थे। डॉक्टरों व अस्पतालों पर मरीजों के परिजनों द्वारा किए जाने वाले हमले और बचाव के तौर तरीके विषय पर इस सेमिनार का आयोजन आईएमए ए.एम.एस. हरियाणा एवं आईएमए फरीदाबाद के सौजन्य से किया गया। ऐसे मामलों को रोकने के लिए डॉक्टरों की एकजुटता पर भी उन्होंने बल दिया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले पर भी प्रकाश डाला कि जब तक अत्यधिक लापरवाही डॉक्टर के खिलाफ साबित नहीं होती तब तक पुलिस डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर सकती। सेमिनार में विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद हरियाणा के पूर्व लोकपाल जस्टिस आई.पी.वशिष्ठ ने बताया कि देश में हर नागरिक की सुरक्षा के लिए कानून बनें हैं, बड़े दुख की बात है कि पुलिस एवं प्रशासन इन्हें सख्ती से लागू नहीं कर पाते। जस्टिस वशिष्ठ के मुताबिक डॉक्टर हो या फिर आम नागरिक किसी के साथ भी मारपीट हो तो पुलिस को तुरंत मामला दर्ज कर कार्रवाई करनी चाहिए। सेमिनार में आईएमए हैडक्वॉर्टर के नैशनल वर्किंग ग्रुप मैंबर डॉ. सतीश चुघ ने कहा कि डॉक्टर समाज के सबसे पवित्र पेशेवर मानेजाते रहे हैं। लेकिन पिछले कुछ सालों में रोगी व उनके रिश्तेदारों द्वारा डॉक्टरों के साथ मारपीट और दुव्र्यवहार की घटनाएं बढ़ी हैं। अगर डॉक्टर के खिलाफ किसी को कुछ शिकायत है तो इसके लिए पहले ही कानून में प्रावधान किया गया है। डॉक्टर की शिकायत पुलिस में की जा सकती है उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जा सकता है। उसके खिलाफ मेडिकल काउंसिल और आईएमए में भी जाया जा सकता है। इस मौके पर डॉ. चुघ ने एक प्रस्ताव रखा कि हरियाणा सरकार को आंध्र प्रदेश सरकार की तर्ज पर डॉक्टरों की हिफाजत के लिए कानून बनाना चाहिए। जिसे सभा में मौजूद डॉक्टरों ने सर्वसम्मति से पारित किया। इस मौके पर आईएमए ए.एम.एस. हरियाणा के सचिव डॉ.अनिल गोयल ने मेहमानों का स्वागत किया और सभा को आईएमए ए.एम.एस की गतिविधियों से अवगत कराया। इस मौके पर आईएमए हरियाणा के प्रधान डॉ. विनोद तायल सचिव डॉ. वी.एन.सूद, एवं एशियन मेडिकल इंस्टिट्यूट के डायरेक्टर डॉ.एन.के.पाण्डेय, आईएमए एएमएस चेयरमैन डॉ.आर.सी.अरोड़ा विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता आईएमए फरीदाबाद के प्रधान डॉ.आर.एन.रस्तोगी ने की। मंच संचालन आईएमए फरीदाबाद के सचिव डॉ.अश्वनी बख्शी ने किया।
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